नमस्ते और आशीर्वाद: सामाजिक अध्यात्म का विज्ञान
भाग 6: "हाथ जोड़कर मिलना: जब अध्यात्म, स्वास्थ्य विज्ञान और मनोविज्ञान को साधता है"
हमने अब तक देखा कि भारतीय अध्यात्म ब्रह्मांडीय सत्यों से लेकर जीवनशैली तक, हर क्षेत्र में विज्ञान से मीलों आगे है। हमारी संस्कृति में दो सबसे सामान्य क्रियाएं हैं: 'नमस्ते' (हाथ जोड़कर किया गया अभिवादन) और 'आशीर्वाद' (बड़ों द्वारा दी गई शुभकामनाएं)।
अक्सर इन्हें केवल शिष्टाचार या परंपरा मान लिया जाता है, लेकिन ये दोनों क्रियाएं स्वास्थ्य, ऊर्जा और मनोविज्ञान के गहरे सिद्धांतों पर आधारित हैं।
1. नमस्ते: शून्य संपर्क और ऊर्जा का प्रवाह
अध्यात्मिक आधार (Zero Contact): नमस्ते की क्रिया में हम बिना शारीरिक संपर्क के, सम्मान और पवित्रता के साथ सामने वाले का अभिवादन करते हैं। दोनों हाथों को हृदय चक्र (Heart Chakra) के पास जोड़कर सिर झुकाया जाता है।
आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान: 'कोविड-19 महामारी' ने पूरी दुनिया को सिखाया कि शारीरिक संपर्क (जैसे हाथ मिलाना) रोगाणुओं (Germs) के संचरण का सबसे बड़ा माध्यम है। विज्ञान ने अब ज़ीरो-टच ग्रीटिंग (Zero-Touch Greeting) को स्वास्थ्य सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण तरीका माना है।
अध्यात्मिक मूल्यांकन: हमारे पूर्वजों ने हजारों साल पहले ही हाथ न मिलाने के नियम को एक सांस्कृतिक शिष्टाचार के रूप में विकसित कर दिया था। यह नियम किसी महामारी की प्रतीक्षा किए बिना, स्वच्छता (Hygiene) और सामाजिक स्वास्थ्य सुरक्षा के सिद्धांत पर आधारित था।
मनोवैज्ञानिक और ऊर्जात्मक लाभ: दोनों हथेलियों को जोड़ना एकाग्रता लाता है और शरीर के 'मेरिडियन पॉइंट्स' (ऊर्जा बिंदु) को सक्रिय करता है, जिससे शांत और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
2. आशीर्वाद और चरण स्पर्श: ऊर्जा का शुद्धिकरण और प्रवाह
आध्यात्मिक शक्ति: आशीर्वाद केवल 'खुश रहो' कह देने से कहीं अधिक है। यह वरिष्ठ व्यक्ति द्वारा अपने गहन अनुभव, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा को कनिष्ठ व्यक्ति के चेतना केंद्र (ऊर्जा चक्र) में हस्तांतरित करने की एक प्रक्रिया है। यह ऊर्जा, प्राप्तकर्ता के आत्मविश्वास और मनोबल को बढ़ाती है।
ऊर्जा का प्रवाह (Good Energy Flow): जब वरिष्ठ व्यक्ति आशीर्वाद देते समय अपना हाथ कनिष्ठ के सिर पर रखते हैं, तो यह माना जाता है कि उनके नाखूनों और बालों (जो ऊर्जा के सीधे संवाहक होते हैं) के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा सीधे प्राप्तकर्ता के मूलाधार या आज्ञा चक्र में प्रवाहित होती है।
चरण स्पर्श और नकारात्मक ऊर्जा का निकास (Draining Negative Energy): चरण स्पर्श की क्रिया, जिसे अक्सर नमन कहा जाता है, में झुककर वरिष्ठों के पैरों को छूना शामिल है। यह केवल सम्मान का प्रतीक नहीं है। हमारे शरीर में नकारात्मक या अनावश्यक ऊर्जा पैरों के माध्यम से पृथ्वी में विसर्जित होती है। जब हम चरण स्पर्श करते हैं, तो वरिष्ठों की सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हमारे भीतर आता है, और साथ ही हमारे शरीर से नकारात्मक ऊर्जा उनके पैरों के माध्यम से धरती में विलीन हो जाती है। यह एक प्रकार का ऊर्जा शुद्धिकरण है।
आधुनिक मनोविज्ञान: मनोविज्ञान अब सकारात्मक मनोविज्ञान (Positive Psychology) और आभार (Gratitude) के महत्व पर जोर देता है। एक वरिष्ठ या विश्वसनीय व्यक्ति द्वारा दिया गया भावनात्मक समर्थन (Emotional Support) व्यक्ति के आत्मसम्मान और लचीलेपन (Resilience) को बढ़ाता है।
निष्कर्ष: सभ्यता का सच्चा विज्ञान
नमस्ते, आशीर्वाद और चरण स्पर्श जैसी क्रियाएं हमें यह बताती हैं कि अध्यात्म केवल पूजा-पाठ नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने का एक वैज्ञानिक और बुद्धिमान तरीका है।
जहाँ आधुनिक विज्ञान को महामारी आने पर शून्य-संपर्क अभिवादन की सलाह देनी पड़ी, वहीं हमारी संस्कृति ने हजारों साल पहले ही इसे शिष्टाचार बना दिया था। यह सिद्ध करता है कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अभ्यास सीधे तौर पर सामाजिक स्वास्थ्य विज्ञान से जुड़े हुए हैं, और इस मामले में, अध्यात्म विज्ञान से मीलों आगे है।
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