कण-कण में राम: चेतना ही परम विज्ञान

 

भाग 4 : जब 'राम' ही संपूर्ण अस्तित्व का सूत्र बन जाते हैं"

हमने अब तक देखा कि कैसे प्राचीन वैदिक ज्ञान और हिंदू दर्शन खगोल विज्ञान से लेकर स्वास्थ्य विज्ञान तक, हर क्षेत्र में आधुनिक विज्ञान से मीलों आगे हैं। परन्तु, यह आध्यात्मिक ज्ञान किस मूल सत्य पर आधारित है? इसका जवाब भारतीय दर्शन के सबसे सरल और सबसे गहरे सूत्र में छिपा है: "कण-कण में राम"

यह वाक्यांश केवल धार्मिक भावना नहीं है; यह सत्य, चेतना और वास्तविकता की प्रकृति का परम वैज्ञानिक निष्कर्ष है।

1. राम: व्यक्ति नहीं, चेतना का प्रतीक



  • आध्यात्मिक सूत्र: 'राम' शब्द यहाँ केवल राजा दशरथ के पुत्र के रूप में नहीं है। 'राम' (रम् + घञ्) का अर्थ है 'जो हर जगह रमण करता है' या 'जो सब में व्याप्त है'। यह उस सर्वव्यापी, शाश्वत चेतना (Cosmic Consciousness) का प्रतीक है जो सृष्टि के हर अणु को चेतनता देती है।

    • "कण-कण में राम" का अर्थ है कि चेतना (Consciousness) ही वह मौलिक ऊर्जा है, जो हर निर्जीव (Matter) और सजीव वस्तु (Life) के भीतर है।

2. कण-कण में राम और क्वांटम भौतिकी (Ram and Quantum Physics):



  • विज्ञान की खोज: आधुनिक क्वांटम यांत्रिकी (Quantum Mechanics) ने सिद्ध किया है कि सूक्ष्म स्तर पर, पदार्थ ठोस नहीं है, बल्कि ऊर्जा की तरंगें हैं, और परमाणु का 99% हिस्सा खाली जगह है। इस खाली जगह को विज्ञान अभी तक पूरी तरह से परिभाषित नहीं कर पाया है।

  • दार्शनिक मूल्यांकन: हिंदू दर्शन पहले ही बता चुका था कि यह खाली जगह (या आकाश तत्व) वास्तव में चेतना से भरी हुई है। जिस ऊर्जा को क्वांटम भौतिकी खोज रही है, उसी को हमारे ऋषि-मुनियों ने 'राम' या 'ब्रह्म' कहा। जब आप किसी कण को तोड़ते जाते हैं, तो आप अंततः उस मूल चेतना तक पहुँचते हैं, जो उसे धारण किए हुए है।

    • हमारा तर्क: विज्ञान अभी भी 'पदार्थ' (Matter) को समझने की कोशिश कर रहा है, जबकि अध्यात्म ने पदार्थ के मूल में स्थित परम सत्य (चेतना) को हज़ारों साल पहले ही पहचान लिया था।

3. मैं और वह: एकता का विज्ञान (The Science of Unity):



  • अद्वैत दर्शन: यह सिखाता है कि आप और मैं अलग नहीं हैं; हम सभी उसी एक राम (एक चेतना) के अंश हैं। यही अहिंसा और प्रेम का आधार है।

  • आधुनिक विज्ञान: विज्ञान ने तंत्रिका विज्ञान (Neuroscience) और पारिस्थितिकी (Ecology) में यह माना है कि मनुष्य एक-दूसरे से और प्रकृति से गहरे जुड़े हुए हैं। लेकिन विज्ञान इस जुड़ाव को भावनात्मक या रासायनिक मानता है।

  • अध्यात्मिक मूल्यांकन: अध्यात्म ने इस जुड़ाव को ऊर्जा के स्तर पर सिद्ध किया—क्योंकि कण-कण में राम हैं, इसलिए मैं और आप एक ही हैं। यह ज्ञान हमें 'वसुधैव कुटुम्बकम्' (पूरी पृथ्वी एक परिवार है) का पाठ पढ़ाता है। विज्ञान अभी भी जुड़ाव के लाभ बता रहा है, जबकि अध्यात्म ने हमें जुड़ाव का कारण (Cause) बता दिया था।

निष्कर्ष: अंतिम सत्य ही सर्वोच्च ज्ञान है

"कण-कण में राम" यह सिद्ध करता है कि अध्यात्म केवल विश्वास नहीं है, बल्कि यह अंतिम सत्य को जानने का विज्ञान है। जहाँ आधुनिक विज्ञान अभी भी अपनी प्रयोगशालाओं में अस्थायी सत्यों को खोज रहा है, वहीं भारतीय दर्शन ने ब्रह्मांड के शाश्वत सूत्र को एक सरल नाम दे दिया है—राम

अध्यात्म की दृष्टि से, विज्ञान की कोई भी खोज तब तक अधूरी रहेगी जब तक वह 'कण-कण में राम' यानी चेतना की सर्वव्यापकता के सिद्धांत को स्वीकार नहीं कर लेती। क्योंकि चेतना ही वह आधारशिला है, जिस पर संपूर्ण सृष्टि का निर्माण हुआ है।

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